5G स्पेक्ट्रम नीलामी : क्या बदला, क्या नहीं?, “5G Spectrum”

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5g spectrum
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5G स्पेक्ट्रम “5G Spectrum” नीलामी, भारत सरकार ने हाल ही लगभग 1.5 लाख करोड़ के 5G स्पेक्ट्रम “5G Spectrum” की नीलामी की है ! जिसके बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है की देश में जल्द ही 5G सेवा शुरू हो सकती है ! आज के इस ब्लॉग में में हम इसी से जुड़े तमाम पहलुओ को जानेंगे!

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क्या होता है ‘स्पेक्ट्रम’? (Spectrum)

उर्जा तरंगो के रूप में ट्रेवल करती है इन्ही तरंगो में से एक होता है इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंग(electro magnetic waves), इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंग को कई आवृतियोमें विभाजित किया जा सकता है ! इन सभी आवृतियो को एक साथ इलेक्ट्रो मैग्नेटिक स्पेक्ट्रम कहते है ! इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंग किसी भी माध्यम से ट्रेवल कर सकती है जैसे – हवा, ठोस, पानी, गैस या वैक्यूम! इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम को सात श्रेणियो में बाँटा जाता है इसी में से एक होता है रेडियो तरंग जिसके माध्यम से दुनियाभर में जितने वायरलेस संचार होता वह इसी के माध्यम से किया जाता है ! रेडियो स्पेक्ट्रम की सीमा 3 किलोहर्ट्ज़ से 3000 गीगाहर्ट्ज़ तक होती है ! रेडियो स्पेक्ट्रम में सीमित संख्या में आवृतियाँ होती है, जिसके माध्यम से दूरसंचार ऑपरेटर डेटा को एक स्थान से दुसरे स्थान पर पहुंचाते है !

स्पेक्ट्रम क्यों बेचती है सरकार?

रेडियो स्पेक्ट्रम पर सिग्रल एक ही समय में अलग अलगआवृतियों पर भेजा जा सकता है।इससे रेडियो कम्युनिकेशन में समस्या पैदा हो सकती है !संकट की स्थिति बन सकती है।किसी का डेटा किसी और के पास पहुँच सकता है।वाई-फाई का सिग्नल फोन में जा सकता है ! रेडियोसंचार में समस्या उत्पन्न हो सकती है !इसी कारण सरकार द्वारा स्पेक्ट्रम को ‘बैंड’ में विभाजित किया जाता है !जिसे अलग-अलग तकनीकों के लिए अलग-अलग निर्धारित किये जाते हैं !

रेडियो: 100 मेगाहर्ट्ज 200 मेगाहर्ट्ज

दूरसंचार: 800 मेगाहर्ट्ज 2300 मेगाहर्ट्ज

इन्हीं स्पेक्ट्रम्स को सरकार द्वारा ऑक्शन के ज़रिये बेचा जाता है ! दूरसंचार ऑपरेटर को बेचा जाता है ! जोदूरसंचार विभाग (संचार मंत्रालय)द्वरा बेचा जाता है !

हालिया 5G स्पेक्ट्रम “5G Spectrum” नीलामी?

72,097.85 मेगाहर्ट्ज (72 गीगाहर्ट्ज) की 5G स्पेक्ट्रमनीलामी हेतु पेश किया गया ! कुल 51.2 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की बिक्री हुई जो 71% है !सरकार इसे बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रही है क्योकि पिछली बार साल 2016 में जब सरकार द्वरा स्पेक्ट्रम की नीलामी की गई थी तो 41% स्पेक्ट्रम ही बिक पाया था !

इस साल सरकार द्वरा 600 मेगाहर्ट्ज, 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1,800 मेगाहर्ट्ज, 2,100 मेगाहर्ट्ज,2,300 मेगाहर्ट्ज, 3,300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज में स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए पेश किया गया था ! यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी थी, इससे सरकार को तकरीबन 1.5 लाख करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ ! इस पूरी नीलामी प्रक्रिया में चार कम्पनी हिस्सा लिया था, ये कंपनीयाँ थी- जिओ , एयरटेल , वोडाफ़ोन आइडिया और अडानी ग्रुप !

700 मेगाहर्ट्ज बैंड की व्यापक विक्री हुई है ! इस बैंड को उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में उपयुक्त माना जाता है। यह उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में बेहतर नेटवर्कप्रदानकर सकेगा !

3,300 मेगाहर्ट्ज बैंड और 26 गीगाहर्ट्ज की व्यापक विक्री5G नेटवर्क स्थापित करने हेतु सबसे उपयुक्तहै ! इस पूरी प्रक्रिया के बाद देश में 5Gनेटवर्क का विकास में बहुत जल्दी हो पायेगा !

5G के विकास से?

‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (IoT) को बढ़ावा मिलेगा

क्लाउड कंप्यूटिंग, बिगडेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एजकंप्यूटिंग आदि का विकास होगा

5G, को चौथी औद्योगिक क्रांति का प्रवर्तक माना जा रहा है?

संबंधित चुनौतियों क्या हैं?

स्पेक्ट्रम का अत्यधिक मूल्य : भारत में 5G स्पेक्ट्रम “5G Spectrum” मूल्य वैश्विक औसत से कई गुना अधिक है!जिसके कारण भारत केसंकटग्रस्त दूरसंचार कंपनियों के लिए समस्या उत्पन्न हो गई है ! कई दूरसंचार कंपनियों ने सरकार के समक्ष अपनी चिंता जाहिर की है !

हार्डवेयर को ‘5G’ के लिए सक्षम बनाना:अधिकांश दूरसंचार हार्डवेयर ‘5G’ के अनुकूल नहीं , भारत के अधिकांश हार्डवेयर विदेशी मूल के हैं जिसके कारण भारत में हमेशा साइबर हमले की चिंता बनी रही है इसे भी ठीक करना सरकार के लिए एक चुनौती है !

उपभोक्ताओं पर अधिक वित्तीय दायित्व:मौजूदा समय में भारत में 4G नेटवर्क अत्यधिक प्रचलित , 4G नेटवर्क से 5G में अपग्रेड करने पर कंपनियों को अत्यधिक निवेश करना होगा जिसके कारण कंपनियों पर अत्यधिक वित्तीय भर बढेगा ! जिसके चलते यह उपभोक्ताओं के लिए अधिक लागतपर उपलब्ध हो सकेगा !

5G स्पेक्ट्रम नीलामी : क्या बदला, क्या नहीं?, “5G Spectrum”

5G तकनीक का पर्यावरण पर प्रभाव:कई विशेषज्ञों का मानना है की 5G तकनीक का दुष्प्रभाव पर्यावरण और पक्षियों पर भी होगा , वही कई विशेषज्ञों का मानना है की इस नई तकनीक का प्रभाव स्पष्ट नहीं है यह आकलन करना अभी बचा हुआ है !

5G Spectrum

आगे की राह ?

5G स्पेक्ट्रम मूल्यों को और अधिक युक्तिसंगत बनाया जाना चाहिए जिससे संकटग्रस्त कंपनियों को कुछ राहत मिल सकेगा और 5G तकनीक को लागू करने में मदद मिल सकेगा

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर को कम किया जाना चाहिए अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट तक पहुँच काफी कम, अभी भी 4G ग्रामीण क्षेत्र में बहुत व्यापक स्तर पर नहीं पहुंचा पाया है ! सरकार को इस पर पहल करना चाहिए जिससे इंटरनेट क्रांति का लाभ गाँवों को मिल सके !

‘मेड इन इंडिया’ के तहतघरेलू दूरसंचार हार्डवेयर क्षेत्रों को मजबूत बनाया जाना चाहिए जिससे साइबरसिक्यूरिटीआधिक होगी और साइबरहमलो की खतरा कम होगी !

5G और दूरसंचार के क्षेत्र मेंसरकार को अनुसंधान और विकास पर भी जोर देना चाहिए

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