Home Sarkari Yojana हर घर तिरंगा अभियान, अब मशीन से भी बनेगा राष्ट्रिय ध्वज

हर घर तिरंगा अभियान, अब मशीन से भी बनेगा राष्ट्रिय ध्वज

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हर घर तिरंगा अभियान
हर घर तिरंगा अभियान,

हर घर तिरंगा अभियान देश के 75 वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार द्वरा हर घर तिरंगा अभियान (HAR GHAR TIRANGA DRIVE ) शुरू किया जा रहा है !

इसका मकसद , सभी भारतीयों को अपने घरो में राष्ट्रिय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करना है यह पहल नागरिको में देशभक्ति की भावना जागृत करने के साथ –  साथ राष्ट्रिय ध्वज के बारे में जागरूकता को भी बढ़ावा देगी

गौरतलब है की इस अभियान को सुविधाजनक बनाने के लिए पिछले साल भारतीय झंडा संहिता में संशोधन किया गया था !

दरअसल, फ्लैग कोड के अनुसार पहले केवल हाथ से बुने हुए या हाथ से काते हुए झंडे बनाने की अनुमति थी

संशोधन के पश्चात अब पॉलिस्टर और मशीन से बने झंडो की भी अनुमति है

विभिन्न मंत्रालयों, गवर्नमेंट – ई – मार्केटप्लेस (GeM)पोर्टल के माध्यम से अपने कार्यालयों के लिए झंडे के आर्डर दे सकते है

इसके तहत निजी संगठन भी भाग ले सकते है और CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी ) संसाधनों सहित योगदान कर सकते है

बता दे की आजादी का आमृत महोत्सव के तहत संस्कृति मंत्रालय द्वरा 11 अगस्त तक देशभर में ‘स्वतंत्रता सप्ताह’ के रूप में मनाने की योजना है

भारतीय ध्वज संहिता क्या है

भारतीय ध्वज संहिता वर्ष 2002 में लागु हुई थी 

यह तिरंगा के सम्मान और उसकी गरिमा को बनाये रखते हुए उसके अप्रतिबंधित प्रदर्शन की अनुमति देती है

संविधान के अनुच्छेद 51 51A (a) के अनुसार, भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा की वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शो और संस्थानों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे

तिरंगा का विकास यात्रा

यह ध्वज भारत की स्वतंत्रता के संग्राम काल में निर्मित किया गया था ! वर्ष 1857 में स्वतंत्रता के पहले संग्राम के समय भारत के राष्ट्र ध्वज बनाने की योजना बनी थी, लेकिन वह आन्दोलन असमय ही समाप्त हो गया था और उसके साथ ही वह योजना भी बीच में ही अटक गई थी ! वर्तमान रूप में पहुचने से पूर्व भारतीय राष्ट्रीय ध्वज अनेक पडावो से गुजरा है ! इस विकास में यह भारत में राजनैतिक विकास का परिचायक भी है ! कुछऐतिहासिक पड़ाव इस प्रकार है  :-

प्रथम चित्रित ध्वज

1904 में स्वामी विवेकानंद की शिष्य भगिनीनिवेदिता द्वारा बनाया गया था ! 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकात्ता ( वर्तमान कोलकत्ता) में इसे कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ! इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था ! ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे और निचे की लाल पट्टी में सूरज और चाँद बनाये गए थे ! बीच की पीली पट्टी पर वंदेमातरम् लिखा गया था !

द्वितीय ध्वज को पेरिस में मैडम भिकाजी कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किये गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था ! यह भी पहले ध्वज के सामान था ; सिवाय इसके की इसमें सबसे ऊपर की पट्टी पर केवल एक कमल था, किन्तु सात तारे सप्तऋषियो को दर्शाते थे ! यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था !

1917 में भारतीय राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया ! डॉ ऐनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने होमरुल आन्दोलन के दौरान तृतीय चित्रित ध्वज को फहराया ! इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियाँ एक के बाद एक और सप्ताऋषी के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ! उपरी किनारे पर बायीं ओर यूनियन जैक था ! एक कोने में सफ़ेद अर्धचन्द्र और सितारा भी था !

कांग्रेस के सत्र बेजवाड़ा (वर्त्तमान विजयवाड़ा) में किया गया यहाँ आन्ध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक झंडा बनाया (चौथा चित्र) और गाँधी जी को दिया ! यह दो रंगों का बना था ! लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है ! गाँधी जी ने सुझाव दिया की भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफ़ेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए !

वर्ष 1931 तिरंगे के इतिहास में एक स्मरणीय वर्ष है ! तिरंगे ध्वज को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया और इसे राष्ट्र – ध्वज के रूप में मान्यता मिली यह वर्त्तमान स्वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफ़ेद और मध्य में गाँधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था ! यह भी स्पष्ट रूप से बताया गया था कि इसका कोई साम्प्रदायिक महत्व नहीं था !

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने वर्त्तमान ध्वज को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया ! सवतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा ! केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान दिया गया !

क्या दर्शाते है तिरंगा के रंग ?

तिरंगा के उपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है ! बीच की पट्टी का सफ़ेद रंग धर्म चक्र के साथ शांति और सत्य का प्रतीक है ! निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है ! सफ़ेद पट्टी पर बने चक्र को धर्म चक्र कहते है ! इस धर्म चक्र को विधि का चक्र भी कहते है जो तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाये गये सारनाथ स्तम्भ से लिया गया है ! इस चक्र के  24 तिल्लियो का अर्थ है की दिन – रात 24 घंटे जीवन गतिशील है और रुकने का अर्थ मृत्यु है !

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